How to LEARN ANYTHING
Do you know?
पर इसका अर्थ यह नहीं है कि हम अपने ब्रेन के फुल पोटेंशिअल का यूज़ ही नहीं कर सकते।अगर आप अपने कॉग्निटिव पोटेंशिअल को ब्रेन ट्रेनिंग की हेल्प से पूरी तरह अनलॉक कर लें, तो आपके लिए कुछ भी अचीव करना मुश्किल नहीं होगा और उस कॉग्निटिव कपैसिटी की मदद से आप अपने लर्निंग प्रोसेसर को 10 टैक्स बढ़ा सकते हो, यानी की 10 गुना बढ़ा सकते हो। आज के इस फास्ट लाइफ में फास्ट लर्निन्ग एक सबसे इम्पोर्टेन्ट लाइफ स्किल है जिसके बारे मेंना ही कोई बात करता है और ना ही ये स्किल आपको अपने स्कूल या कॉलेज में सीखने को मिलती है। तो आज के इस Article में हम ऐसे ही हेक्स और ट्रिक के बारे में बात करेंगे जो आपको इसे अनलॉक करने में हेल्प करेंगे तो बिना टाइम वेस्ट किये आते हैं अपने मेन टॉपिक पर
1. MORNING AND NIGHT LEARNING TECHNIQUE
यदि यही प्रैक्टिस आप कुछ समय तक लगातार करें तो आप उस स्किल या हैबिट को बहुत जल्दी डेवलप करेंगे और उसे रिटर्न कर पाएंगे, जिससे आपकी जो लर्निंग स्पीड है ना।वो बहुत तेज हो जाएगी और आपका दिमाग उसे गहराई में लॉक कर लेगा जिससे आप उसे भूलेंगे नहीं।
आपके ब्रेन के अटेन्शन, स्पेन टाइम के अकॉर्डिंग काम करती है जिससे आपका ब्रैंड किसी चीज़ को जल्दी और लंबे समय के लिए कैप्चर कर पाता है। इस मेथड को फ्रैनसिसको सिरिलो के द्वारा लेट 19 एटीज़ में डेवलप किया गया था। ये एक टाइम मैनेजमेंट का तरीका है जो आपके लर्निंग स्पीड और फोकस को इम्प्रूव करता है और आपको किसी भी चीज़ को याद करने में उसको जल्दी सिखाने मैं आपकी हेल्प करता है। इस टेक्नीक का रूल ये हैकि आप एक टास्क लेंगे और उसे 205 मिनट्स के लिए घड़ी के अलार्म के साथ में करेंगे।
2. 100% FOCUSED LEARNING AND PRACTICE
आप में से ज्यादातर लोग कोई नई स्किल्स सीखने को उत्सुक रहते हो पर उसकी प्रैक्टिस नहीं करते हो और यही कारण है की कुछ भी ब्रेन में रिटर्न करना मुश्किल होता है। लर्निंग की स्पीड बढ़ाने के लिए।सीखना, प्रैक्टिस और इम्प्लिमेंटेशन करना बहुत ज़रूरी होता है। हमारे साइअन्टिस्ट में कहते है की आपका सीखना यानी की आपको जो इनपुट है दैट शुड बी 40% और जो आपकी प्रैक्टिस है यानी की जो प्रैक्टिकल काम आप कर रहे हो आप उसको इम्प्लिमेंट कर रहे हो और जो आपका आउटपुट है दैट शुड बी 60% यानी की आपके प्रैक्टिस ज्यादा मायने रखती है और यही प्रो से सांप के लर्निंग को स्पीड अप कर सकता है।लर्निंग के लिए 100% फोकस क्यों जरूरी है?
इस बात को अगर एक एग्जाम्पल के जरिये पे समझे तो ज्यादा बेहतर समझ में आएगा। क्या आपको याद है कि जब बचपन में आप साइकल चलाना सीख रहे थे और आपका ध्यान डिस्ट्रिक्ट हो जाता था तो आपकी साइकिल लर्निंग प्रोसेसेस ब्रेक होती थी और आप शायद एक छोटे से ऐक्सिडेंट का शिकार भी हो जाते होंगे? यही थ्योरी हमारे लाइफ लॉन्ग लर्निंग पर भी अप्लाई होती है। अगर आप अपने लर्निंग पर100% फोकस नहीं करेंगे, वो डिस्ट्रिक्ट होंगे। तो आप किसी भी हैबिट को ये स्किल को ना तो फास्ट सीख पाएंगे और ना उस लर्निंग को आप रिटर्न कर पाएंगे।
अगर आप कोई नई चीज़ सीख रहे हैं और आप उस।मेरे को समझाते है या सिखाते हैं, तो आप उस लर्निंग को रिटेन और रिकॉल करने की अपनी जो ब्रेन पावर है उसको आप इन्क्रीज़ करते हैं। ये प्रोसेसर आपके उस सब्जेक्ट मैटर के स्किल को डेवलप करने के साथ ही आपके अंदर एक स्ट्रॉङ्ग लाइफ स्किल भी इम्प्रूव करती है।क्योंकि ये जो नॉलेज शेयरिंग है वो आपको उस सीखे हुए पर रिफ्लेक्ट करने में हेल्प करती है और रिफ्लेक्शन किसी चीज़ को जल्दी सीखने का एक की फैक्टर होता है।
3. REFLECTIVE TEACHING
रिफ्लेक्टिव टीचिंग या लर्निंग बी टीचिंग के इस मेथड को इस नाम से भी जाना जाता है जो आपकी स्क्रीन पर है। मैं आपसे ये चैलेंज भी कर सकता हूँ की आपने कभी ना कभी ये जरूर सुना होगा की सीखने का सबसे अच्छा।और सरल तरीका उसे दूसरों को सीखाना होता है। रिचर्ड फेनमैन के अनुसार अगर आप किसी कॉनसेप्ट को किसी 5 साल के बच्चे को ना समझा सकते है तो उसका अर्थ है की आप उस सब्जेक्ट को खुद मास्टर नहीं कर पाए।
4. POMODORO TECHNIQUE
आपके ब्रेन के अटेन्शन, स्पेन टाइम के अकॉर्डिंग काम करती है जिससे आपका ब्रैंड किसी चीज़ को जल्दी और लंबे समय के लिए कैप्चर कर पाता है। इस मेथड को फ्रैनसिसको सिरिलो के द्वारा लेट 19 एटीज़ में डेवलप किया गया था। ये एक टाइम मैनेजमेंट का तरीका है जो आपके लर्निंग स्पीड और फोकस को इम्प्रूव करता है और आपको किसी भी चीज़ को याद करने में उसको जल्दी सिखाने मैं आपकी हेल्प करता है। इस टेक्नीक का रूल ये हैकि आप एक टास्क लेंगे और उसे 205 मिनट्स के लिए घड़ी के अलार्म के साथ में करेंगे।
उसके बाद आपको 5 मिनट का ब्रेक लेना होगा। ये पैटर्न आपको चार बार रिपीट करना पड़ेगा और उसके बाद में आपको 30 मिनट का एक लंबा ब्रेक लेना पड़ेगा। इस तरीके को फॉलो करने से और एक शोर्ट टाइम स्पेन के लिए। पूरे फोकस के साथ किसी एक चीज़ को करने से आपका ब्रेन उसे अच्छे से रिटर्न करता है और ये आपके लर्निंग प्रोसेसर।इम्प्रूव करता है ये मेथड मल्टीटास्किंग की जगह सिंगल टास्किंग को इम्पोर्टेन्स देता है।
ये जो फिफ्थ मेथड है ना, ये बहुत ही इंट्रेस्टिंग लर्निंग मेथड है। इस मेथड को कहा जाता है जिसका मतलब है किसी बड़े पीस ऑफ इंफॉर्मेशन को छोटे छोटे मैनेजेबल चंक्स में डिवाइड करना। इस को जॉर्ज मिलर नामक साइंटिस्ट ने 1956 में अपने एक रिसर्च पेपर में इंट्रोड्यूस किया था। उनके अनुसार ह्यूमन ब्रेन जो होता है ना वो एक टाइम पर केवल पीसी।जो इन्फॉर्मेशन को याद कर सकता है।
5. CHUNKING\ LEARNING BY MICRO TO MACRO
इसलिए अगर बड़े टास्क को छोटे छोटे चंख में डिवाइड करके प्रैक्टिस किया जाए तो आपका ब्रेन उस चीज़ को अपनी मेमोरी में अच्छे से स्टोर कर पाता है। जैसे हम इसे चेस के एग्जाम्पल से समझ सकते हैं। अगर आप जैसे सीखना चाहते हैं और शुरू में ही चेस की सारी गोटियां को और उनकी चाल को समझने की कोशिश करेंगे तो आप सिर्फ अपने ब्रेन को कन्फ्यूजपर अगर आप इसी प्रोसैस को चंक्स में डिवाइड कर दें जैसे की पहले सिर्फ दो तीन गोलियों की चाल को समझेंगे और उनपे फोकस करेंगे तो आप जल्दी और अच्छा सीख।इस मेथड को माइक्रो टू।मेट्रो लर्निंग भी कह सकते है। मतलब टार।मिशन और उसके बाद उसके भी घर ऐस्पेक्ट को सीखना और समझना
ये एक ऐसी लर्निंग प्रोसेसर है जो कोई भी स्किल या हैबिट आपके अंदर करने के लिए सिर्फ 21 डेज़ लेती हैं। एक रिसर्च के अनुसार दो ग्रुप के लोगों को स में टास्क परफॉर्म करने के लिए दिया गया। पर डिफरेन्स ये था कि इन दोनों ग्रुप्स को वो टास्क डिफ़रेंट टेक्नीक से कंप्लीट करना था। एक ग्रुप को रैपिड लर्निंग प्रोसेसर से काम करना था और दूसरे ग्रुप कोलॉन्गर, इंटरवल लर्निंग प्रोसेसर के अकॉर्डिंग और इसलिए सर्वे के बाद मैं साइअन्टिस्ट ने पाया कि जीस ग्रुप ने लॉन्गर इंटरनल प्रोसेसर को फॉलो किया। उस ग्रुप के लोगों का टास्क जो है ना उसको पूरा कर पाने की सक्सेस रेट ज्यादा थी।
6. LONGER INTERVAL LEARNING PROCESS
ऑथर बनीं टिक्करी ने भी ये कहा है की लर्निन्ग बगीचे को पानी देना जैसा काम होता है। अगर हम सारा पानी एक बार में दे देंगे तो वो बगीचे को हरा भरा रखने में हेल्प नहीं करेगा।बट अगर हम उसी पानी को इंटरवल में ब।करेंगे।अभी तक उस बगीचे को सुरक्षित और हरा भरा रख पायेगा 21 लॉंग।ये है की आप।जो भी चीज़ सीखना चाहते हैं या याद करना चाहते हैं उसे पढ़ेंगे या उसकी प्रैक्टिस करेंगे और फिर उसी चीज़ को उसी सेम चीज़ को 24 घंटे के बाद में फिर से आप प्रैक्टिस करेंगे या पड़ेंगे? फिर सेवंथ डे पर रिपीट करेंगे और फिर 20 फर्स्ट डे पर रिपीट करेंगे उसको 21 दिन के बाद में आप ये एक्सपिरियंस करेंगे की वो जो चीज़ है वो आपके दिमाग में बैठ गई है और आप उसे कभी नहीं भूलेंगे।ये मैं नहीं रिसर्च कहता है


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